शनिवार, 3 दिसंबर 2011

(प्रकृति की गोद में !


रात और दिन ...कितने खूबसूरत दो वक़्त है..और कितने खूबसूरत दो लव्ज़.. अब इन दो वक्तों के बीच एक वक़्त ऐसा भी आता हें जिसे शाम का वक़्त कहते है..यह ऐसा वक़्त है जिसे न रात अपनाती है .. न दिन अपने साथ लेके जाती है..अब इस छोड़े हुए या छूटे हुए लावारिस वक़्त से अक्सर कोई लम्हा चुन लेता हें.. और सी लेता हें अपने शेरो में....लेकिन कोई कोई शाम भी ऐसी बांज होती हें...की कोई वक़्त दे के नहीं जाता..कोई लम्हा देके नहीं जाता ...!!!




(प्रकृति की गोद में !! 

*मनीष मेहता !

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