बुधवार, 1 जून 2011

वो पागल लड़की !



"जाने फिर कितने दिन इंतजार में गुज़ार दिए उसने ! सुबहा से शाम अपने कमरे की खिड़की में लगे परदे के पीछे से झांकती रहती थी ! शायद उसके लौट आने का इंतजार था उसे ! और ये सोचती रहती की काश इक बार लौट के आता...!
मेरी बात सुनता मुझे फिर से समझ पाता ! दिन कुछ यूँ गुज़र रहे थे उसके जैसे रेगिस्थान में प्यासा तडपता  हुआ मृग ! इक इक कदम खिसक-खिसक के चल रहा हो, और हर अगले क़दम पै उससे अपनी मंजिल नज़र आ रही हो ! 

कुछ पल यूँ ही ख़ामोश रहने के बाद उसने डायरी 
के कोरे पन्नो में स्याई फेरी...! कुछ सब्द उभर आये .... "कितना याद आते हो तुम " ! और बहुत कुछ लिखना चाहती थी वो .. न जाने क्यूँ लफ्ज़ नहीं मिल रहे थे शायद ! .. कलम थम सी गई थी ...सांसें धधक रही थी, जैसे कि जलते हुए आग में घी डाल दिया हो ! आँखें लाल हो चुकी थी रो-रो के ! सामने पड़ी डायरी के पन्ने आँसुओं की बरसात में गीले हो गए थे ..! आँसूं वो सब कुछ कह गये थे जो शायद वो मुद्दतों से कहना चाहती थी....लिखना चाहती थी ! 
 



और बहुत लिखने कि कोशिस कि उसने...सिर्फ इतना लिख पाई...!
आज सांसें भी चुब रही है मेरी...धड़कने सिमट सी गई है ! जीने कि कोई आरज़ू नहीं !
आ जाओ अब, कि ज़िन्दगी कम सी है !!!





मनीष मेहता !
Copyright © 2011, 



(चित्र- गूगल से ) 

 

2 टिप्‍पणियां:

  1. Us ghehri shab me,
    tanhaa the hum raat bhar,
    khaali tha vo kamra,
    aur khaali raha mann mera,
    thi bas ek aas uski,
    aur kuch baki raha eshaas uska.. !!

    ur words.. always takes me to the depth of emotions.. they are always true.. full of purity.. n always in a simple attire.. loved it.. !! :) :)

    http://safakijubaan.blogspot.com/

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  2. jab bhi padti hun tumhein to yun lagtaaa hae duniyaa tham si gai hae kuch palon ke liye .. sab kuch aankhon ke samne ho jaise.. again a nice creation !!!


    Good Bless U !!!!!!

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