शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

माँ तुम मुझे बहुत याद आती हो !

"ना जाने क्यूँ आज दिल में एक चुभन सी है....यादों के झरोखों से झाँक के देखा तो सामने खुबसूरत बचपन का ज़मान था.....सचमुच कितना खुबसूरत था न बचपन का ज़माना...


वो बचपन कि मस्तियाँ, वो शरारतें ...दादी का ऐनक छुपा देना....दादाजी को घोड़ा बना के उनकी सवारी करना.......गुल्ली-डंडा लिए दोस्तों के साथ घंटों खेलना, वो गुड्डे कि शादी में बाराती बन के नाचना..बरसात के बाद खिलखिलाती धूप पै घर से निकलना . पानी पै छप्प-छप्प खेलना....कागज़ कि नाव बना के पानी पै खेलना,....और कपड़ों को भीगा देना, फिर बाबूजी की डांट और मेरा नाराज़ हो जाना तुम्हारा मुझे गोद पै रखना...और मनाना......सच कहू तो जब तुम मुझे अपनी गोद पै रखती थी न और प्यार से अपने हाथों से मेरे बालों को सहलाती थी न ...कितना अच्छा लगता था उस पल........तुम्हारा मुझे समझाना ."कि बेटा अच्छे बच्चे ये नहीं करते.....अच्छे बच्चे वो नहीं करते.....में चुपचाप सुनता रहता था तब......!!!


मुझे याद है जब पहली बार में तुमसे जुदा हुआ था.. १० वी कि परीक्षा पास करने के बाद जब में आगे कि पढाई के लिए शहर आ रहा था .....कितना रोई थी तुम मुझसे लिपट के उस पल...और तब तक मुझे देखती रही थी .. जब तक में तुम्हारी नज़रों से ओझल न हो गया था..शायद उसके बाद तक भी...तुम्हारा प्यार भरा नर्म स्पर्श अब भी महसूस करता हूँ....!!


याद हें मुझे मेरे मना करने पर भी तुम्हारा वो बैग में चुपके से परांठे रख देना...उस रात को जब बैग में उलट पुलट के देखता था......कि तुमने कुछ रखा होगा...........और किताबों के दरमियान उन पराठों को पाकर......दिल भर जाता था....वो पल मुझे सबसे प्यारे लगते हैं..! उन पराठों को छुते ही तुम्हारे होने का अहसास होता था..........जेसे ही पहला नेवला लेता था.....तो तुम्हरे हाथों कि खुशबू महकने लगती थी...और उन्हें खा कर अक पल के यूँ लगने लगता था कि जेसे तुम यही कही हो मेरे पास.....और प्यार से मेरे बालों में उंगलिया फिर रही हो.... और कह रही हो कि तुम मेरे प्यारे प्यारे बेटे हो...!!! और न जाने फिर कब नीद के आगोश में चला जाता था में पता ही नहीं चलता था....!!


रात जब तुम ख्वाबों में आयीं तो लगा यूँ कि जैसे मन की मुराद पूरी हो गयी हो ...एक बार फिर से तुम्हे गले लगाकर दिल को सुकून मिला ... देर शाम रसोई से निकल जब तुम मेरे पास आ ....पहला निवाला खिलाती हो ...वो मुझे सबसे प्यारा लगता है ....और पेट भर जाने पर भी जब तुम कहती हो बस एक और एक और सह माँ बहुत याद आता है .....जब यहाँ दूर ख़ुद को तन्हा पाता हूँ ....हर बार पहले निवाले पर तुम याद आ जाती हो ....वही मुस्कुराता चेहरा ...और वही तुम्हारे हांथों में पहला निवाला....

 सच माँ जिंदगी में इस जीने की दौड़ और चंद कागज़ के टुकड़ों की चाहत ने मुझे तुमसे कितना दूर कर दिया शायद बहुत दूर.....जब भी आँखें भर आती हैं ....तो तुम्हारे पास भाग आने को मन करता है ...तुम्हारे गोद में सर रख के जोर से रोने को मचलता है.....दिल करता है फिर से वही ज़िन्दगी जियूं.......वो सार दिन खेलना ..तुम्हारे आँचल टले जिंदगी गुजारना .....तुम्हारा ऊँगली पकड़ मुझे स्कूल तक छोड़कर आना .....छुट्टी हो जाने पर वहीँ खड़े रहना इस विश्वास के साथ कि माँ आएगी मुझे ले जायेगी ....और फिर दूर तुम्हारा मुझे आते दिखाई देना ...और दिल ही दिल खुश होना ....



और वो फिर तुम्हारे हाँथों से खाना खाना ....जबरन दूध का गिलास लेकर तुम्हारा मेरे पास आना .. मेरा रोज़ की तरहा मना करना और फिर तुम्हारा मुझे प्यारी प्यारी कहानिया सुनाना,,,,मुझे याद है मुझे दूध अच्छा नहीं लगता लगता था...लेकिन तुम्हारे प्यारे हाथों के अहसास में खों के कब जाने दूध का गिलास खत्म कर देता था...पता भी नहीं चलता........शायद तुम्हारे हाथों में कुछ जादू था...


फिर पूरे दिन खेल में मस्त रहना .... पापा के डाँटने पर अपनी गोद में छुपा लेना ..... सच माँ सब कुछ पहले जैसा हो तो कितना अच्छा हो है ना ....ना मेरे घर से आने पर तुम उदास हो ....और ना मैं दूर जिंदगी की दौड़ लगाऊँ ....


सच माँ एक बार फिर से तुम्हारे आँचल की छत के तले .....प्यार की दीवारों के बीच ज़िन्दगी गुजारने को मिल जाए तो कितना सुखद हो ....मेरा रूठना , तुम्हारा मनाना .... पास आना ...सीने से लगाना ....


माँ अभी अभी फिर से तुम्हारे नर्म हाथों को महसूस किया मैंने ..... ऐसा लगा जैसे तुम इतने दूर से भी मेरे मन को सुन रही हो ...हमेशा की तरह और कह रही हो में तुम्हारें पास हूँ हर पल....!!!






माँ तुम मुझे बहुत याद आती हो...............!!!


 
 
तुम्हारा ........... मनीष







Copyright © 2011, 










( चित्र- गूगल से )

37 टिप्‍पणियां:

  1. SO realstic.....!!!
    cho chweet my devil monkster....!!!
    juzz heart throbbng..!!!

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  2. सच मै मनीष जी मैंने आपके लेख को पढ़ कर अपना बिता जमाना याद आ गया..हा ये अलग बात है कि मै अपनी माता जी के साथ सदा ही रहा हू, पर आपके लेख को पड़ते-२ मै अपने बचपन के दिनों मै चले गया.... अपनी दादी जी का प्यार फिर से महसूस होने लगा है जो बचपन मै छोड़ आया था इस शहर मै आते हुए ..एक बीते ज़माने कि नारी आज जो दादी कहलाती है,वो जाने इतना प्यार क्यों लुटाती थी ...?
    आज कि आधुनिकता मैं वैसा प्यार और दुलार अब कहा से पाए...?

    आपका लेख ने दिल के मचलते टिस को दुबारा से फिर से जगा गया...
    कि अब ऐसा दुलार और पयार कहा से पाए..?

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  3. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  4. मनीष बहुत खुबसूरत.............सच में यार तुमनें आँखें नम कर दी...तुम छोटे छोटे उन पलों को जीवंत करा गये...तुम्हारी लिखने का ये तरीका मुझे अच्छा लगता है ..कि छोटी छोटी बातों का उन हरकतों को वेसे भी बयान करना............लिखते रहिएगा....इंतजार रहता है आपके पोस्ट का....

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  5. मनीष बहुत खुबसूरत.............सच में यार तुमनें आँखें नम कर दी.

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  6. मनीष जी जिदगी मे जो पल निकल जाते है लोट कर नहीं आते | सिर्फ यादें रह जाती हैं| बहुत अच्छा लगा|

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  7. मनभावन रचना, दिल को छू जाने वाली रचना,
    अति सुन्दर, सटिक, एक दम दिल कि आवाज.
    कितनी बार सोचता हु कि इतना अच्छा कैसे लिखा जाता है.
    अपनी ढेरों शुभकामनाओ के साथ
    shashi kant singh
    www.shashiksrm.blogspot.com

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  8. आप सभी मित्रों का में तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूँ....आपका प्यार साथ रहेगा तो आगे ख्यालों कि दुनिया का ये मुसाफिर भटकते भटकते किसी और पड़ाव पै पहुचेगा................और कुछ न्यू पोस्ट पड़ने को मिलेगा.....अपना प्यार बनाये रखियेगा.!!!

    आपका सुभचिन्तक
    मनीष मेहता
    http://tumharakhyaal.blogspot.com/2010/07/blog-post.html

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  9. ब्‍लागजगत पर आपका स्‍वागत है ।

    किसी भी तरह की तकनीकिक जानकारी के लिये अंतरजाल ब्‍लाग के स्‍वामी अंकुर जी,
    हिन्‍दी टेक ब्‍लाग के मालिक नवीन जी और ई गुरू राजीव जी से संपर्क करें ।

    ब्‍लाग जगत पर संस्‍कृत की कक्ष्‍या चल रही है ।

    आप भी सादर आमंत्रित हैं,
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    सुझाव दें, और अगर हमारा प्रयास पसंद आये तो हमारे फालोअर बनकर संस्‍कृत के
    प्रसार में अपना योगदान दें ।
    धन्‍यवाद

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  10. "सच माँ जिंदगी में इस जीने की दौड़ और चंद कागज़ के टुकड़ों की चाहत ने मुझे तुमसे कितना दूर कर दिया शायद बहुत दूर.....जब भी आँखें भर आती हैं ....तो तुम्हारे पास भाग आने को मन करता है ...तुम्हारे गोद में सर रख के जोर से रोने को मचलता है..."
    मनीष आपने ज़िन्दगी कि भागदौड़ और वक़्त कि अवाधापी के बीच छुटते रिश्तों का अहसास करा दिया...बेहद भावूक और दिल कु छुने वाला लेख..
    सच तो यही है कि माँ तो bas माँ है....
    hamesa khush raho और likhte raho....

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  11. Bahut badhiya manish bhai
    asha hai ke aage bhi hume aisi hi ache ache lekh milte rahenge jo dil ko choo lete hain

    Thanks Buddy

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  12. rly manish m mesmerized .....m full of tears ..maa ek pyara shabd aur ek khubsurat tohafa jo bahgwan ne ek bachhe ko diya hai tumne un sare ehsas ko wo har choti badi baton ko apne shabdo me byan kiya hai jiska koi mol nhi .....keep it up

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  13. Hey manish Bhahut hi khubsurat likha hain. sach mein MA ke sath har chiz jo hum bachpan se karte aye hui hain, tumne woh badi hi khubsurati se likha hain. really love it man. All d best..

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  14. manish bhai apne sach main bahut achha likha aisa lag raha tha padh ke jese ki main khud apne bachpan main chala gaya hu. mera pure dil chu gaya bhai really bhai bahut achha likha hai !

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  15. सही लिखा है आपने !मनीष भाई माँ माँ ही होती है माँ जैसा कोई नहीं !!

    बहुत बढ़िया और दिल को छु गयी हमारी ये आप की रचना !!

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  16. ki baat chu daju,
    bad bhal lago ho ,
    tumari kalam mai to jadu chu ho,
    go ghar ki yaad ay gy ho maharaj .

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  17. manish ji aapne ma ki yad taja kar di....


    upendra.. www.srijanshikhar.blogspot.com

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  18. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  19. इस नए सुंदर चिट्ठे के साथ आपका ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  20. maa is a precious gift in this world n here we can c in these line

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  21. Her MAA aisa hi karati hai..... per kya her bachcha tumhare jaisa hi sochata hai.......it is great !!! agar tum MAA ko etana yaad kerate ho aur sammaan dete ho!!!bhagwaan tumhe khush rakhe!!!...PRATIBHA

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  22. ma jante ho na is shabed mai kitni mittas hoti hai ma bus ma hoti hai uske do hath or kitna sara pyer wo badle mai kuch bhi nahi mangti bus bolti hai khush raho or apne pallu sa aakhen pooch kr ghum jati hai sham ka khana bannae k liya bhagvan manish ko sadev khush rekhe god bless u

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  23. Hey manish Bhahut hi khubsurat likha hain. sach mein MA ek khubshurat ahsash hae... aap apni Maa ke khubshurat baccche ho...

    Take Care

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  24. bahut badhiyaa rachnaa.maa hotee hee aisee hai.

    jananaa chaho agar sabse keematee shai ko,
    lagaa sab daon par ek maa khareed kar dekho.

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  25. nice manish......jo likha hain tumne dil se likha hain......tuamhri harr baat dil chu lati hain.....will pray for u....take care...

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  26. bahut khubsurat manish....bilkul dil se likhi rachna he....MAA ka prem aur sparsh aisa he hota he......

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  27. maa ke liye jitna kaha jaye shayad utna hi kam ho,duniya mein ssbse pyaara rishta maa ka hi hota hein,manish ji aapke lekh ne aankho ko nam kar diya,aapka lekh maa ke liye ek bahut hi pyara sandesh hein.

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  28. आप सभी मित्रों का तहे दिल से शुक्रिया ! मेरे ब्लॉग से जुड़े रहिये !

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